Friday, August 19, 2022
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Bharat Ki Rajdhani | भारत की राजधानी कहाँ हैं और इसका इतिहास क्या है?

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भारत की राजधानी कहाँ हैं और इसका इतिहास क्या है? Bharat Ki Rajdhani

नमस्कार दोस्तों, Achejankari.com पर आपका स्वागत है। अगर आप किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं या एक स्टूडेंट हैं तो आपको भारत की राजधानी कहाँ है और इसका इतिहास क्या है इसके बारे में पूरा जरूर जानना चाहिए। इस आलेख में आगे हम Bharat Ki Rajdhani Kya hai, पहले हमारे देश की राजधानी कहाँ थी तथा इसके सम्पूर्ण इतिहास के बारे में पूरी जानकारी देंगे। ये जानकारियां न केवल आपके परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बल्कि यह आपके सामान्य ज्ञान में भी वृद्धि करेगी।

 

● भारत की राजधानी कहाँ है?

वर्तमान में भारत की राजधानी नई दिल्ली (New Delhi) है। यह एक केंद्र शासित प्रदेश (Union Territory) है। भारत का संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, उच्चतम न्यायालय (Supreme Court), प्रधानमंत्री आवास व कार्यालय, केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवास तथा भारत की अन्य महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्थाओं का मुख्यालय भी नई दिल्ली में ही स्थित है।
नई दिल्ली भारत का प्रमुख महानगर है। यहाँ इंटरनेशनल एयरपोर्ट, मेट्रो, उच्च स्तरीय स्टेडियम, केंद्रीय विश्वविद्यालय, टॉप इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेज आदि कई सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह शहर सड़क व वायु मार्गों द्वारा देश के ज्यादातर शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। अर्थव्यवस्था की दृष्टि से भी यह देश का महत्वपूर्ण शहर है।

● भारत की राजधानी नई दिल्ली का भूगोल :

राजधानी दिल्ली भारत का एक अत्यंत प्राचीन शहर है। यह हमेशा से भी भारत की राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। इसके भूगोल की बात करें तो यह दो राज्यों- हरियाणा और उत्तर प्रदेश से घिरा हुआ है। यह 28°61′ उत्तरी अक्षांश तथा 77°23′ पूर्व देशांतर पर स्थित है। इसका कुल क्षेत्रफल 1484 वर्ग किलोमीटर है। दिल्ली शहर यमुना नदी के दोनों किनारों पर बसी है।
दिल्ली में कुल 11 जिले हैं। यहाँ लोकसभा की 7 सीटें तथा दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार दिल्ली की जनसंख्या 1.68 करोड़ थी। यह दुनियां का पांचवां और भारत का सबसे अधिक जनसंख्या वाला शहर है।

● भारत के सभी राज्य और उसकी राजधानी :

“भारत की राजधानी कहाँ है” के बारे में जानने के बाद अब आपको भारत के राज्यों व उसकी राजधानी के बारे में भी जानना चाहिए। यह जानकारी सामान्य ज्ञान की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
वर्तमान में भारत में कुल 28 राज्य हैं। इन सभी राज्यों के नाम व उसकी राजधानी इस प्रकार है :-
1. उत्तर प्रदेश – लखनऊ
2. मध्यप्रदेश – भोपाल
3. बिहार – पटना
4. पश्चिम बंगाल – कोलकाता
5. गुजरात – गांधीनगर
6. राजस्थान – जयपुर
7. उत्तराखंड – देहरादून
8. हिमाचल – शिमला
9. झारखंड – रांची
10. छत्तीसगढ़ – रायपुर
11. पंजाब – चंडीगढ़
12. हरियाणा – चंडीगढ़
13. उड़ीसा – भुवनेश्वर
14. अरूणाचल प्रदेश – ईटानगर
15. असम – दिसपुर
16. मिजोरम – आईजोल
17. मणिपुर – इंफाल
18. सिक्किम – गंगटोक
19. मेघालय – शिलांग
20. नागालैंड – कोहिमा
21. त्रिपुरा – अगरतल्ला
22. आन्ध्रप्रदेश – हैदराबाद
23. तेलंगाना – हैदराबाद
24. केरल – तिरूवनंतपुरम
25. तमिलनाडु – चेन्नई
26. कर्नाटक – बैंगलोर
27. महाराष्ट्र – मुम्बई
28. गोवा – पण्जी

● भारत के केंद्र शासित प्रदेश और वहाँ की राजधानी :

1. दिल्ली – नई दिल्ली
2. अंडमान निकोबार द्वीप समूह – पोर्टल ब्लेयर
3. चंडीगढ़ – चंडीगढ़
4. दादरा और नागर हवेली तथा दमन और दीव – दमन
5. जम्मू और कश्मीर – श्रीनगर (ग्रीष्मकालीन राजधानी) , जम्मू (शीतकालीन राजधानी)
6. लद्दाख – लेह
7. लक्ष्यद्वीप – करवत्ती
8. पॉण्डिचेरी – पॉण्डिचेरी

● दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी?

दिल्ली के पहले भारत की राजधानी Bharat ki Rajdhani कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) थी। दिसंबर 1911 में ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम ने राजधानी को दिल्ली शिफ्ट करने की घोषणा की। साथ ही उन्होंने राजधानी को व्यवस्थित ढंग से बनाने के लिए “नई दिल्ली” की नींव रखी। बाद में गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली का आधिकारिक रूप से उद्घाटन किया।
मुझे उम्मीद है अब आपको “दिल्ली भारत की राजधानी कब बनी?” प्रश्न का उत्तर मिल गया होगा।

● दिल्ली का इतिहास (History of Delhi) :

Bharat Ki Rajdhani New Delhi एक अत्यंत प्राचीन शहर है। इसका एक महत्वपूर्ण व गौरवशाली इतिहास रहा है। प्राचीन काल में इसका नाम इंद्रप्रस्थ था। यह शहर महाभारत काल में से ही भारत की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बिन्दु रहा।
माना जाता है कि दिल्ली को विदेशी आक्रांताओं के द्वारा सात बार नष्ट किया गया और पुनः सात बार पुनः स्थापित किया गया। यह शहर आज भी अपनी कई सारी प्रचीन धरोहरों को संभाले हुए हैं।

● दिल्ली का प्राचीन इतिहास :

माना जाता है कि दिल्ली का अस्तित्व 1400 ईस्वी पूर्व महाभारत काल से ही है। तब यह भूमि बंजर हुआ करती थी, जिसे पांडवों को दिया गया था। पांडवों ने इस शहर को बसाया तथा इसका नाम इंद्रप्रस्थ रखा। इंद्रप्रस्थ का अर्थ होता है – इंद्र का शहर।
भारत की राजधानी दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ से दिल्ली कैसे पड़ा इस संबंध में विभिन्न इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं। फिर भी सबसे ज्यादा प्रचलित मत यह है कि 800 ईस्वी पूर्व यहाँ के राजा ढिल्लू हुआ करते थे, जो जाट समुदाय के ढिल्लों गोत्र से संबंधित है। तब इसका नाम “दिल्हीका” था। जो कालांतर में अपभ्रंश होकर “दिल्ली” बना।

● मौर्य शासन काल में दिल्ली :

मोर्चा शासन काल के समय का दिल्ली राजनीतिक रूप से ज्यादा महत्व नहीं था क्योंकि उस समय मौर्य साम्राज्य की राजधानी मगध थी। इसके बाद तकरीबन 1300 वर्षों तक दिल्ली राजनीतिक रूप से उपेक्षित रहा। हलांकि तब उस समय भी यहाँ आबादी बसती थी।

● तोमर राजवंश के समय दिल्ली :

काफी समय तक उपेक्षित रहने के बाद दिल्ली के इतिहास में नया मोड़ तब आया जब अनंगपाल सिंह तोमर (प्रथम) ने 736 ईस्वी में तोमर राजवंश की स्थापना दिल्ली में की। दिल्ली में तोमर राजवंश का शासनकाल 736 ईस्वी से लेकर 1178 ईस्वी तक रहा। इस दौरान इस राजवंश के कुल 23 राजाओं ने दिल्ली पर शासन किया।

● पृथ्वीराज चौहान के समय दिल्ली :

चौहान राजवंश के राजा पृथ्वीराज तृतीय जिससे सामान्यतः पृथ्वीराज चौहान कहा जाता है का भी शासन दिल्ली पर था। उन्होंने 1178-80 के आसपास दिल्ली पर अपना शासन स्थापित किया था। उस समय उनका शासन दिल्ली और अजमेर दोनों जगहों पर था। उन्होंने ने ही दिल्ली के मेहरौली के आसपास के इलाकों को बसाया तथा वहाँ कई निर्माण कार्य किए। पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली का अंतिम हिंदू सम्राट माना जाता है।


● दिल्ली पर मुस्लिम शासकों का आगमन :

पृथ्वीराज चौहान के शासन काल में मुस्लिम शासक मोहम्मद गोरी आया था और दोनों के बीच 1191 में युद्ध हुआ। इसे ताराईन का प्रथम युद्ध भी कहा जाता है। इस युद्ध में पृथ्वीराज चौहान की जीत हुई। जीत के बाद पृथ्वीराज चौहान ने दयाभाव दिखाते हुए मोहम्मद गोरी को जाने दिया।
लेकिन अगले ही वर्ष 1192 में गोरी ने पुनः दिल्ली पर आक्रमण कर दिया। इसे ताराईन का द्वितीय युद्ध कहा जाता है। इस युद्ध में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की हार हुई और दिल्ली पर मोहम्मद गोरी का शासन स्थापित हो गया। यह समय दिल्ली के इतिहास का एक टर्निंग प्वाइंट माना जाता है जब हिंदू शासकों के बाद पहली बार दिल्ली मुस्लिम शासकों के हाथ में गई।

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● दिल्ली सल्तनत का इतिहास :

मोहम्मद गोरी का गुलाम कुतुबुद्दीन ऐबक था। 1206 ई. में गोरी की हत्या के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक दिल्ली की गद्दी पर बैठा। उसे गुलाम वंश का पहला शासक माना जाता है। यहीं से दिल्ली सल्तनत काल आरंभ हुआ।
1206 से 1526 ई. तक का समय दिल्ली का सल्तनत काल कहा जाता है। इस दौरान पांच वंश के सुल्तानों ने दिल्ली पर शासन किया। ये सभी वंश तुर्क और अफगान से संबंधित थे। इन पाँच वंशों का शासन इस प्रकार था :
1.) गुलाम वंश (1206 से 1290 ई. तक)
2.) खिलजी वंश (1290 से 1320 ई. तक)
3.) तुगलक वंश (1320 से 1414 ई. तक)
4.) सैयद वंश (1414 से 1451 ई. तक)

5.) लोदी वंश (1451 से 1526 ई. तक)


● दिल्ली में मुगल शासकों का आगमन :

मुगल साम्राज्य ने दिल्ली को राजनीतिक रूप से नई पहचान दी। तब यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप का राजनीतिक केंद्र बिन्दु बन गया। 1526 ई. में बाबर ने लोदी वंश के अंतिम सुल्तान इब्राहिम लोदी को हराकर मुगल साम्राज्य की स्थापना की। उन्होंने 1526 से 1530 तक दिल्ली पर शासन किया। उसके बाद बाबर को हराकर शेरशाह सूरी ने दिल्ली पर कब्जा कर शासन स्थापित किया। फिर 1640 में हुमायूँ एक निर्वासित राजा बने और उन्हेंने 1556 तक शासन किया।


इसके बाद हुमायूँ के पुत्र अकबर दिल्ली की गद्दी पर बैठे। अकबर को मुगल शासनकाल का सबसे महत्वपूर्ण शासक माना जाता है। उन्होने मुगल साम्राज्य का काफी विस्तार किया। अकबर 1605 तक दिल्ली के शासक बने रहे।

अकबर के बाद 1605 में उसके बेटे जहांगीर मुगल साम्राज्य के शासक बने। जहांगीर ने भी लगभग 22 वर्षों तक दिल्ली पर शासन किया। फिर 1627 ई. को जहांगीर के बेटे शाहजहां ने गद्दी संभाली।


आधिकारिक रूप से माना जाता है कि शाहजहां ने अपने बेगम मुमताज के लिए आगरा का ताजमहल बनवाया। शाहजहां के बाद 1658 ई. में उसके बेटे औरंगजेब ने अपने पिता को गद्दी से हटाकर सत्ता पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। औरंगजेब को मुगलशासन काल का सबसे क्रूर शासक माना जाता है। औरंगजेब अंतिम महत्वपूर्ण मुगल बादशाह थे। वह 1707 ई. तक दिल्ली के शासक बने रहे।


औरंगजेब के बाद क्रमशः बहादुर शाह (प्रथम), जहांदार शाह, फर्रूखशियार, रफी उल दर्जत, शाहजहां द्वितीय, मुहम्मद शाह, अहमद शाह बहादुर, आलमगीर द्वितीय, शाहजहां तृतीय, शाह आलम द्वितीय, अकबर शाह द्वितीय तथा बाहादुर शाह द्वितीय थोड़े-थोड़े समय के लिए शासक बने। परन्तु इन सभी का कोई विशेष प्रभाव नहीं रहा। बहादुर शाह द्वितीय जिसे बहादुर शाह जफर भी कहा जाता है वह मुगल साम्राज्य के अंतिम शासक थे।


● ब्रिटिश शासन काल में दिल्ली का इतिहास :

आधुनिक भारत की राजधानी दिल्ली को ब्रिटिश सरकार की देन मानी जाती है। ईस्ट इंडिया कंपनी ने वर्ष 1803 में एंग्लो-मराठा युद्ध के पश्चात् दिल्ली पर कब्जा कर लिया। इसके बाद कंपनी ने दिल्ली में एक संरक्षक शासक को नियुक्त किया। 1857 के विद्रोह के बाद दिल्ली में काफी परिवर्तन हुआ। इसका एक तिहाई से ज्यादा हिस्सा खंडहरों विद्रोह के बाद खंडहरों में बदल गया। फिर 1857 में कंपनी ने इसे ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन कर दिया।


काफी समय के बाद ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज पंचम की दिल्ली पर नजर पड़ी और उन्होंने 12 दिसंबर 1911 को दिल्ली को ब्रिटिश भारत की नई राजधानी घोषित की। इससे पहले कलकत्ता भारत की राजधानी हुआ करता था। लेकिन समुद्री सीमा के कारण ब्रिटिश शासन को वह असुरक्षित महसूस हो रहा था, इसलिए भारत के मध्य में स्थित दिल्ली शहर को ब्रिटिश भारत की राजधानी बनाने का निर्णय लिया।


जॉर्ज पंचम ने दिल्ली को राजधानी के रूप में व्यवस्थित करने के लिए दिल्ली के अंदर ही एक हिस्से को नई दिल्ली के रूप में डेवलप करने के लिए आधारशिला रखी। बाद में ब्रिटिश सरकार के गवर्नर जनरल लॉर्ड इरविन ने 13 फरवरी 1931 को नई दिल्ली का उद्घाटन किया। तब से लेकर आज तक भारत की राजधानी दिल्ली ही है।

मुझे उम्मीद ही अब आपकी भारत की राजधानी नई दिल्ली के इतिहास, भूगोल, इसका वर्तमान स्वरूप आदि के बारे में सभी महत्वपूर्ण जानकारी मिल गई होगी।


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Important FAQ about Bharat Ki Rajdhani New Delhi :

1.) भारत की राजधानी कहाँ है?
– नई दिल्ली भारत की राजधानी है। इसे 12 दिसंबर 1911 को देश की राजधानी बनाई गई। इससे पहले कलकत्ता देश की राजधानी थी।
2.) दिल्ली की कुल क्षेत्रफल कितना है?
– Bharat Ki Rajdhani दिल्ली का कुल क्षेत्रफल 1484 वर्ग किलोमीटर है।
3.) दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री कौन हैं?
– श्री अरविंद केजरीवाल दिल्ली के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं। वह 28 दिसंबर 2013 में पहली बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे। इसके बाद लगातार तीसरी बार दिल्ली के मुख्यमंत्री बने हैं।
4.) दिल्ली से पहले भारत की राजधानी कहाँ थी?
– दिल्ली से पहले कोलकाता (वर्तमान कलकत्ता) भारत की राजधानी थी।
5.) दिल्ली का प्राचीन नाम क्या था?
– दिल्ली का प्राचीन नाम इंद्रप्रस्थ था। यह शहर महाभारत काल से ही अस्तित्व में हैं।
6.) दिल्ली में घूमने लायक जगहें कौन-कौन सी है?
–  Bharat Ki Rajdhani नई दिल्ली एक ऐतिहासिक शहर होने के कारण यहाँ कई सारी प्राचीन व आधुनिक स्मारक व इमारतें मौजूद हैं, जहाँ आप घूमने जा सकते हैं :
1. लाल किला
2. दिल्ली स्मारक
3. राष्ट्रपति भवन
4. इंडिया गेट
5. कुतुबमीनार
6. संसद भवन
7. लोटस टेम्पल
8. जामा मस्जिद
9. अक्षरधाम मंदिर
10. हुमायूँ का मकबरा
11. नेशनल वॉर मेमोरियल
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