Friday, September 30, 2022
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ब्रह्म मुहूर्त क्या होता है? ब्रह्म मुहूर्त में उठने का चमत्कार जानिए !

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आज की भाग दौड़ भरी जीवन में सुबह उठना किसे पसंद है? शायद ही ऐसा कोई होगा जो इतनी सुबह उठता होगा। पर क्या आपने कभी देखा है कि सुबह सूर्योदय से पहले उठने से मन कितना फुर्तीला रहता है।
वेदों में भी सूर्योदय से पहले उठने की सलाह दी गई है। पर आजकल मानता कौन है? मगर हम इन सब बातों महज पुरानी बातें मान कर इससे मिलने वाली कई सारे फायदे से खुद को बंचित करते है।
दोस्तों, आज हम सूर्यादय से पहले यानी कि ब्रह्म मुहूर्त में उठने से आपको क्या क्या फायदे मिल सकते है उस बारे में चर्चा करेंगे।

ब्रह्म मुहूर्त क्या होता है?

सूर्योदय से पहले के समय को जिस वक़्त न तो सुबह होती है और न ही रात, उस वक़्त को ब्रह्म मुहूर्त या मूरत से जाना जाता हैै। इस समय को ब्रह्मा यानि सृष्टि के रचयिता के समर्पित किया गया है। इस समय को देवों के समय भी माना जाता है। इस समय उठने से इसका शारीर और मन पर सकारात्मक प्रभाव देखे जा सकते है। रात भर के विश्राम से जब शारीर फिर से सक्रीय होने लगता है, तब की हुई सभी कार्य में सफलता की गुंजाइश और भी बढ़ जाती है। वेदों में इस समय ध्यान लगाने और ज्ञान अर्जन हेतु समर्पित करने की सलाह दी गयी है।

ब्रह्म मुहूर्त या ब्रह्म मूरत को कैसे जाने ?

दोस्तों, मनुस्मृति की माने तो एक दिन 30 मुहूर्त के होते है। जिसमे दिन और रात सामिल है। यानि के एक दिन और एक एक रात को मिलकर एक दिवस होते है। इस हिसाब से सिर्फ एक रात में होते है 15 मुहूर्त।
पूरी रात की 15 मुहूर्त में से 14 वि मुहूर्त को ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है। एक मुहूर्त 48 मिनट के होते है। उस हिसाब से ब्रह्म मुहूर्त सूर्योदय के एक मुहूर्त के पहले वाले मुहूर्त से सुरु होकर एक मुहूर्त पहले खत्म हो जाते है। आसान भाषा में समझे तो यह मुहूर्त सूर्योदय के 96 मिनट या 1 घंटा 36 मिनट पहले सुरु होकर 48 मिनट तक रहता है।
ब्रह्म मुहूर्त में बिस्तर छोड़ कर अपने नित्य कर्मो को निपटा कर ध्यान लगाने , पढाई करने या फिर योग करने में ब्यतीत करने पर आपको कई सारे फायदे मिल सकते है।

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रात के सभी मुहूर्त में से ब्रह्म मुहूर्त को सबसे ज्यादा शक्तिशाली और अमृत माना जाता है। इस मुहूर्त का भगवान के जागरण के मुहूर्त भी माने जाते हैं।

वेदों पुराणों और ग्रंथों में ब्रह्म मुहूर्त का उल्लेख :-

मनुस्मृति में ब्रह्म मुहूर्त का उल्लेख है। ब्रह्म मुहूर्त कब शुरु होकर कब खत्म होता है इस बारे में भी मनुस्मृति में कहा गया है। मनुस्मृति के हिसाब से ब्रह्म मुहूर्त को रात के सारे 15 मुहूर्त से सबसे पवित्र और शक्तिशाली मुहूर्त माना जाता है। जैसे हम भगवान ब्रह्मा को सृष्टि के रचयिता मानते हैं वैसे ही ब्रह्म मुहूर्त एक मनुष्य के जीवन में कई सारे बदलाव और गठन करने के लिए सक्षम माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त को योगा, ज्ञान की प्राप्ति, वेदों के अध्ययन और मुश्किल से मुश्किल विषय का अध्ययन करने में व्यतीत करने के लिए सलाह दी गई है।

चरक संहिता में छात्रों के लिए अध्ययन विधि बताते हुए कहा गया है कि सुबह सूर्योदय से पहले यानी कि ब्रह्म मुहूर्त में उठ कर अध्ययन करना चाहिए। इस समय अध्ययन करने से ज्ञान की प्राप्ति होने के साथ-साथ समृद्धि भी होती है।
अष्टांग ह्रदय ग्रंथों में भी ब्रह्म मुहूर्त का तात्पर्य बताते हुए कहा गया है कि इस मुहूर्त में उठने से सारे रोगों से मुक्ति मिलती है। इसमें और भी कहा गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में उठने से आपको संसार के सारे सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है और आपके जीवन में खुशहाली और समृद्धि प्राप्ति होती है।

अथर्व वेद में भी ब्रह्म मुहूर्त का उल्लेख है। इसमें कहा गया है कि जिस व्यक्ति का आचार विचार, खानपान सही हो और जो रात को जल्दी सो कर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठता हो उसके जीवन सुख में होता है।

ब्रह्म मुहूर्त के बारे में उल्लेख की गई कुछ श्लोक:-

ब्रह्मा ज्ञानम तदर्थं
अध्ययनद्यपि ब्रम्हा
तस्कर योग्य मुहूर्त ब्रह्म
( यानि की ब्रम्ह मुहूर्त /मूरत सारी मुहूर्तों में से सबसे पवित्र और शास्क्तिशाली मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में उठकर अपने मन को ज्ञान और बिद्या प्राप्ति हेतु लगाने चाहिए। इस मुहूर्त में योग, प्राणायाम जैसी शारीरिक ब्यायम करने की आबश्यक है)

उद्यनादितयः रासमभिः सिरनो रोगं अनिनिस्तं ।
(अथर्ववेद – जो इंसान ब्रह्म मुहूर्त में उठता है उसे रोग और ब्याधि छू नहीं सकते। सारे रोगों से मुक्त हो कर वो एक कुशल जीवन ब्यतीत करता है)

मुहूर्ते बुध्येत धर्मार्थ
चानू चिंतायते
काये क्लेशांश तंमुलांवेदेत्त आर्थमेव
( ब्रह्म मुहूर्त भगवान के जागरण का मुहूर्त होता है। इस मुहूर्त में आप आध्यात्मिक रूप से परमात्मा से जुड़ सकते है। इस मुहूर्त में ध्यान, धर्म, अर्थ, ज्ञान प्रति हेतु ध्यान लगाने की सलाह दी गयी है)

युक्ताहार विहारस्य युक्त चेस्तस्य कर्मसु युक्त स्वप्नाव बोधोस्य योगों भवति दुखः।
( जिस मनुष्य के चालचलन, अचार बिचार, खान पान में शालीनता हो और जो रात को जल्दी सो कर सुबह जल्दी उठकर भगवन का जाप करता हो वो हर ब्याधि और रोग से मुक्त एक जिंदेगी का हक़दार रहता है)

दीक्षा नित्यं ब्रह्मकाले , सुभोत्तानं पवित्रते।
( ब्रह्म मुहूर्त किसी भी ज्ञान के प्रति का उपयुक्त समय होता है, इस कल में विद्यार्थियों को ध्यान लगाकर ज्ञान अर्जन करना चाहिए)

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ब्रह्म मुहूर्त में उठने के फायदे:-

1- ब्रम्ह मुहूर्त में उठने से स्वाथ्य में उन्नति आता है ।

वेदों, पुराणों और उपनिसदों में ब्रह्म काल या मुहूर्त के बारे में उल्लेख है। इस समय बिस्तर छोड़ने से स्वस्थ्य लाभ होता है। अच्छे सेहत के लिए हर किसीको ब्रह्म मुहूर्त में उठना चाहिए। रोगग्रस्त ब्यक्ति बिसेष चाहे तो इस मुहूर्त में न उठ सकते है।

2- ब्रह्म मुहूर्त में उठने से बिद्या की प्राप्ति होती है।

ब्रह्म मुहूर्त को अध्ययन का सबसे उचित काल मन जाता है। इस मुहूर्त में उठकर अध्ययन करने से मुश्किल से मुश्किल बिद्या भी कंठस्थ होते है। पुराने ज़माने में वेदों के अध्ययन हेतु सारे शिष्य इस मुहूर्त में उठकर ज्ञान लाभ करते थे।

3-ब्रह्म मुहूर्त में उठने से रोगों से मुक्ति मिलती है

ब्रह्म मुहूर्त को सबसे ज्यादा शक्तिशाली और पवित्र मुहूर्त माना जाता है। इस मुहूर्त में उठने से संसार के सारे सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होते है। जिससे की आपके शारीर को कई सारे रोगों से मुक्ति मिलती है।

4- ब्रह्म मुहूर्त में उठने से आध्यात्मिक चेतना की प्राप्ति होती है।

ब्रह्म यानि के संसार के रचयिता सामान यह मुहूर्त देवों के मुहूर्त होते है। इस मुहूर्त में उठकर ध्यान लगाने से या मैडिटेशन करने से आपके मन में सकारात्मक चिंतन का प्रसार होने के साथ साथ परमब्रह्म से जुड़ने के मार्ग भी खुल जाते है।

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5- बर्ह्म मुहूर्त में उठने से प्रकृति से नजदीकियां बढ़ती है।

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर घूमने से आप प्रकृति को और भी नजदीक पाएंगे। सौर सपाटे से भरी इस दुनिया सुबह के समय अत्यंत शांत रहता है। इस समय बहार घूम आने से आप ताजी हवा के आनंद भी ले सकते है। जो के आपके शारीर के लिए लाभदायी है।

ब्रह्म मुहूर्त में सोने के नुकसान क्या है?

  1. ब्रह्म मुहूर्त यानि की सूर्योदय के पहले के समय हमारा दिमाग सबसे ज्यादा सक्रिय होता है। इस समय उठकर पढ़ने या ध्यान लगाने से शारीर और मन को ज्यादा फायदे मिलते है। अगर इस समय आप सो के रहते है तो आप उन सभी मिलने वाली लाभ से बंचित होंगे।
  2.  ब्रह्म मुहूर्त में उठकर योग, ब्यायम अदि करने से शारीर ज्यादा शाक्तिशाली बनती है। आप चाहे दिन में कितना भी ब्यायम करले सुबह की जितने फायदे आपको कभी प्राप्त नहीं होती है।
  3. ब्रह्म मुहूर्त में सोते रहकर देर से उठने वालो जी जीवन दुखमयः रहता है। हमेशा से उनके दिमाग में सुबिचार के कमी रहती है
  4.  दिन भर कितना भी पढाई करले , परंतु याद रखने में दिक्कत होती है। क्यों की दिन होते होते आपके मन में नाना बिचार विमर्ष भर जाते है जिससे की आपको बिद्या के लिए ध्यान नहीं लगा पाते।

दोस्तों आज हमने ब्रह्म मुहूर्त  के बारे में काफी विस्तार से चर्चा किया है। हमने काफी कुछ नयी नयी बातें भी सीखी है । हम आप सब से भी गुज़ारिश करते है कि आप भी ब्रह्म मुहूर्त में उठने की प्रयास करे। पोस्ट के बारे में अपना बिचार हमे कमेंट बॉक्स पर लिख कर बताना न भूले।

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